Narendra Modi’s blog

Narendra Modi has started blogging. Here is his blog: 



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14 responses to “Narendra Modi’s blog

  1. gajanan

    Today is 14th April; 118th birth anniversary of Dr. Babasaheb Ambedkar. I pay my humble tribute to this great personality who born in the underprivileged section of the society overcame difficulties and challenges he faced. His mantra was “Educate yourself, come together and stand for your rights”.


    When you think of BRA , the way he came up in life is itself a great inspiration. He had his problems with Gandhi and Nehru , but there are some facts which one may not know. Here is it

    “Ambedkar’s efforts in later life to secure for Sanskrit common cultural space and labour with regional languages of India (Joshi does mention that as a student, Ambedkar was prevented from sitting in the Sanskrit class because of his birth in the Mahar caste). A dispatch of the Press Trust of India (PTI) dated September 10, 1949 states that Ambedkar was among those who sponsored an amendment making Sanskrit as the official language of the Indian Union in place of Hindi. Most newspapers carried the news the next day, i.e., on September 11, 1949 (see the issue of Sambhashan Sandeshah, a Sanskrit monthly published from Delhi , June 2003: 4-6).

    Other dignitaries who supported Dr Ambedkar’s initiative included Dr B.V. Keskar, then the Deputy Minister for External Affairs and Professor Naziruddin Ahmed. The amendment dealt with Article 310 and read: 1.The official language of the Union shall be Sanskrit. 2. Notwithstanding anything contained in Clause 1 of this article, for a period of fifteen years from the commencement of this constitution, the English language shall continue to be used for the official purposes of the union for which it was being used at such commencement: provided that the President may, during the said period, by order authorise for any of the official purposes of the union the use of Sanskrit in addition to the English language . But the amendment was defeated in the Constituent Assembly due to the opposition of the ruling Congress Party and other lobbyists”.

    If Ambedkar had succeeded, the renewed interaction between Sanskrit as the national language and speakers of other languages would have initiated a sociological process of upward and downward mobility. While rulers, pilgrim centres, and temple complexes used to be the traditional agents of such interaction, the state operated broadcasting agencies, school textbooks, and the film and music industry would have emerged as new agents facilitating that interaction”

    Abstracted from

    Even after being denied in childhood , BRA wanted Sanskrit as major language in India. Just see how it was defeated in the assembly by Congress.

    Even his conversion to Buddhism , an indigenous faith has to be applauded, when the two agressive Semitics were ready to grab him. His asking for separate Dalit electrol role, was due to his genuine concern for Dalits and not as projected by media as some sort of separate identity. His rejection of the two major Abrahamic faiths is written in a chapter by Gauri Vishwanathan in the book ” Conversion to Modernity” —- The Globalization of Christianity– Edited by Peter Vam Der Weer . This bk is available on google.

  2. Incognito

    The book “Worshipping False Gods” by Arun Shourie gives a different, a rather uncomplimentary picture, of BRA.

    • gajanan

      Arun Shourie is right on many things, but on BRA he goes a bit overboard. About JNU historians I agree with Shourie.

      BRA was not swayed by the two agressive Semitics. Further , if BRA had hatred , he would not have initiated Sanskrit at a national level, which the Congress led by Nehru opposed. In fact we would have Discovered a New India by now ( 60 yrs) if the Sanskrit bill been passed.

      About BRA’s critique of many things in Sanatan Dharma(SD), was due to frustration. Naipaul in ” Among the believers ” novel has an excellent line about converts. It goes like this ” A convert rejects his origins by impulse”

      BRA critiqued SD due to frustration ( a psychological impulse) .

      Another thing about Sanatan literature is that many translations and interpretations have come from the Brits and other westerners , whose half baked translations , without through knowledge of Sanskrit has led to all flimsy writings and given room for writing anything about SD. .

      If India had passed the bill moved for Sanskrit then in 1948-49, we would be having now very good translations in Sanskrit of our ancient literature and Valmikis Ramayana would not be having mutilated interpretations as it has been done and being continued even now.

  3. राजभाषा संस्कृत हो
    ‘हिन्दुस्तान'( हिन्दी )—— 12, सितम्बर, 1949

    नई दिल्ली, 10 सितम्बर । विधान सभा के जिन सदस्यों ने संस्कृत को भारतसंघ की राजभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा है, उनमें भारत के कानून मंत्री डा0 अम्बेदकर भी हैं । आपके समर्थकों में उपविदेशमंत्री डा0 बी बी केस्कर
    तथा नजीरुद्दीन अहमद भी हैं ।

  4. अम्बेदकरः संस्कृतेन भाषते स्म
    सम्भाषण-सन्देश:, जून, 2003 ( e-mail: samskrit@
    “भारतस्य राजभाषा संस्कृतं भवेत्” इति संविधानसभायां शोधप्रस्तावः आनीतः आसीत् यस्य प्रस्तावस्य कृते हस्ताक्षरकर्तृषु प्रस्तावमण्डयितॄषु च डा. अम्बेदकरः अपि अन्यतमः आसीत्।
    संविधानसभायां यदा राजभाषासम्बन्धे चर्चा प्रवर्तते स्म तदा डा. अम्बेदकरः किञ्च पण्डितलक्ष्मीकान्तमैत्रः व परस्परं संस्कृतेन वार्तालापः कृतवन्तौ। तत्सम्बन्धे “आज” इति हिन्दीदिनपत्रिकायां 15 सितम्बर 1949 तमे दिनाङ्के प्रकाशिते प्रकाशिता वार्ता – “डा. अम्बेदकर का संस्कृत में वार्तालाप” इति अस्ति। एषा एव वार्ता प्रयागतः प्रकाश्यायां THE LEADER इति आंग्लपत्रिकायां 13 सितम्बर 1949 तमे दिनाङ्के मुखपृष्‍ठे प्रकाशिता आसीत्। तस्याः शीर्षकम् आसीत् “THEY CONFER IN SANSKRIT” इति।देहल्यां राष्‍ट्रीये अभिलेखागारे शताधिकवर्षेभ्यः सर्वासां पत्रिकाणांसमाचारपत्राणां च “मैक्रो फिल्म” कृत्वा संरक्षितवन्तः सन्ति। तानि सर्वाणि दृष्‍ट्वा अस्माभिः बहु अन्वेषणं,गवेषणं च कृत्वा एताः महत्त्वभूताः वार्ताः प्राप्‍ताः।
    —– चमू कृष्ण शास्‍त्री ( संस्कृत भारती, माता मन्दिर गली, झण्डे वाला, नई दिल्ली – 55 )

  5. gajanan

    Anal Kumarji. Wah bhai Wah. Yeh baath mai baar likh raha hu aur aapna justice kaar dala , sahi bhasha me likhkar.

    This fact about BRA many in India do not know. I am happy that you have posted this.

  6. ( अनल कुमार )

    SUNDAY, APRIL 26, 2009

    डा. अम्बेदकर ने संस्कृत को प्रशासनिक भाषा का प्रस्ताव किया था

    दैनिक जागरण ( जालन्धर, सोमवार, 7 मई 2001 )
    पठानकोट, 6 मई (जसं) । देश की प्रशासकीय भाषा हेतु भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अम्बेदकर ने संस्कृत के पक्ष में जो प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, उसका सभी प्रान्तों के प्रतिनिधि विद्वानों की ओर से हस्ताक्षरित समर्थन किया गया था। यह बात सर्वहितकारी शिक्षा समिति (पँजाब) के उपाध्यक्ष यशपाल मेहता ने कही। उन्होंने कहा कि 26 मार्च 2000 को दिल्ली के विज्ञान भवन में मानव संसाधन मंत्री मुरलीमनोहर जोशी ने कहा था कि आध्यात्मिकता, साहित्य, विज्ञान, ज्योतिष शास्त्र, वास्तुकला, गणित, न्याय दर्शन, व्याकरण, भाषा विज्ञान आयुर्वेद तथा अनेक ज्ञान की विद्याओं का प्रवाह संस्कृत में हो रहा है। अतः हमें संस्कृत शिक्षण प्रसार प्रचार में पूर्ण योगदान करना चाहिए तथा इस संबंध में गत 5 अप्रैल, 2001 को विश्‍व संस्कृत सम्मेलन में कहा था कि वे पण्डित घराने में जन्में हैं और उन्होंने संस्कृत विषय बी.ए. तक पढ़ा हुआ इसके बावजूद् वह संस्कृत बोल नहीं सकते और न ही संस्कृत में किसी से वार्तालाप कर सकते हैं, इससे बड़ी पीड़ा की बात उनके लिए क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति इतना मोह रखने वाले नेताओं की ओर से संस्कृत भाषा को आठवीं से बंद करने की बात क्यों की जा रही है। सरकार की ओर से निर्णय लिया गया है कि नौवीं के बाद कोई व्यक्‍ति संस्कृत पढ़ना चाहता है तो उसे हिन्दी, अंग्रेज़ी व संस्कृत में से कोई भी दो विषय चुनने पड़ेगे। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से संस्कृत पड़ने वालों की संख्या शून्य हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अग्रेज़ सरकार का धन्यवाद करना चाहिए कि उनके शासन में उन्होंने संस्कृत पढी है तथा अब केन्द्रीय विद्यालय का विद्यार्थी केवल आठवीं तक संस्कृत पढ़ने वाला होगा तो बी.ए. तक संस्कृत कहाँ से पढ़ेगा? उन्होंने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ने वाले मंत्रियों और सासदों के बच्चे भी संस्कृत नहीं पढ़ पाएँगे। तदर्थ माननीय नेताओं से निवेदन किया जाता है कि वह इस निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार करें और इस दिशा में सही कदम उठाकर निर्णय लें।

  7. अनल कुमार

    दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित “विश्‍व संस्कृत सम्मेलन” ( 5 से 9 अप्रैल,2001 ) में सामान्य व्यक्‍ति भी बड़ी सहजता से संस्कृत बोल रहे थे। यह देखकर उद्‍घाटनकर्ता प्रधानमंत्री वाजपेयी जी के मुख से निकल गया,” मैं पण्डित घर में जन्मा, मैंने बी.ए. तक संस्कृत का विषय भी पढ़ा,पर मैं संस्कृत नहीं बोल सकता, उसमें वार्तालाप नहीं कर सकता,इससे बड़ी पीड़ा की बात मेरे लिए क्या हो सकती हैं “(पथिक संदेश, मई 2001,पृष्‍ठ संख्या 14-15)।
    संस्कृतवर्ष समारोह ( 26 मार्च,2000 ) में उद्‍घाटनकर्ता मुरली मनोहर जोशी के संस्कृत में भाषण को सुनकर यही पीड़ा मुझे भी हुई थी ,क्योंकि मैं केन्द्रीय-विद्यालय-संगठन की ओर से चयनित सुयोग्य संस्कृत शिक्षक के रूप में प्रतिनिधित्व करने पर भी सहजता से संस्कृत बोलने में असमर्थ था ।
    25 अप्रैल को आपकी (Narendra Modi ) संस्कृत भाषा में वैबसाईट का अनावरण जानकर आपसे प्रेरणा लेकर संस्कृत के विकास के लिए वैबसाईट पर कार्य प्रारम्भ किया है ।

  8. I have no words to say about you and your work sir in GUJRAT.Mind Blowing sir.I am Jain from LIMBDI.Kiritsinh Rana(Van Mantri)from LIMBDI.In a school time we was friend. now last 14 years i am in Ahmedabad.I have 10 years boy and 2years Daughter.But sir now i am in big trouble.My wife Harita And One Muslim Guy from Juhapura ARIF Hit me and my 60 years old Mothe.on that day i left my flat.on that day i was very seek.Now i think that they both of you wants to kill me or both of my child.please sir Help me.My address is Bhavin Sureshbhai Shah,B-704,Kalyan Tower,Begind lake-view appartment,Near jay somnath flat,Near Kalyan prusti haveli,Opp.Vastrapur lake,Vastrapur,Ahemdabad.My Mobile Number is +91 9228407842.Sir please save me or my perents or both of my childs.Jay Hind.

  9. Anonymous

    Mr.go on Sir DON’T BE SCARED
    “The ultimate measure of a man is not where he stands in moments of comforts and convinence,
    Where he stands at times of CHALLANGE AND CONTROVERSY”

  10. Anonymous

    समाज को नैतिक पतन से बचाना है, भृष्टाचार मुक्त राष्ट बनाना है, आजादी को सुरक्षित रखना है तो संस्कृत को बढावा देना होगा यही एक मात्र समस्या का समाधान है। वन्दे संस्कृत मातरम्

  11. Anonymous

    हम सभी जानते है कि वैग्यानिक भाषा संस्कृत का पतन मुगल शासको तथा ईसाई शासको द्वारा भारत को कमजोर करने के लिए किया गया लेकिन वे स्वयं अब इसका अध्यन कर रहे है। कही ऐसा न हो हमे अपनी ही भाषा विदेशियो से पढना पढे अतः जागो भारतीयो जागो स्वयं पढो तथा दूसरो को पढाओ। वन्दे संस्कृत मातरम् {सन्दीप दमोह मध्यपर् देश }

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